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बंगाल में एक्शन, बिहार में टेंशन! ‘बांग्लादेशी दामाद’ की कहानी से सहमा सीमांचल, 1954 के बाद क्या हुआ?

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admin रिपोर्टर
पब्लिश: 28 May 2026, 10:01 AM
अपडेटेड: 28 May 2026, 10:01 AM
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अररिया/कटिहार. पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई का असर अब बिहार के सीमांचल इलाके में भी दिखने लगा है. बंगाल से सटे अररिया, कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया जैसे जिलों में लोगों के बीच यह डर बढ़ गया है कि कहीं वहां से निकाले जा रहे घुसपैठिए चोरी-छिपे सीमांचल में शरण न लेने लगें. नेपाल की खुली सीमा और बंगाल से कनेक्टिविटी होने की वजह से यह इलाका पहले से ही संवेदनशील माना जाता रहा है.

अररिया के गांव में पहले भी पकड़ा गया था बांग्लादेशी नागरिक

अररिया जिले के रामपुर कोदरकट्टी पंचायत के मरंगी बंगाली टोला में करीब डेढ़ वर्ष पहले एक बांग्लादेशी नागरिक मो. नवाब को गिरफ्तार किया गया था. आरोप था कि वह अपनी पहचान छिपाकर गांव में दामाद बनकर रह रहा था. इस घटना के बाद से इलाके में अवैध घुसपैठ को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बंगाल में चल रही सख्ती के बाद अब सीमांचल के इलाकों में सतर्कता और बढ़ाने की जरूरत है.

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दैनिक भास्कर के लिए लिखते हैं। अनुभवी पत्रकार जो राजनीति, समाज और तकनीक के मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते हैं।

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